Kavita Jha

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रक्षाबंधन #लेखनी दैनिक कविता प्रतियोगिता -06-Aug-2022

रक्षाबंधन 
मनहरण घनाक्षरी 
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मन करे राखी ले के, सीमा पर मैं भी जाऊँ,
देश रक्षा की खातिर, गया है मेरा भाई।

घर वालों से है दूर, धरती माँ का है नूर,
हुआ क्यों है मजबूर, बहना याद आई।

राखी बिन है उदास, मैं जाती उनके पास,
बांँधती रेशम डोरी, खिलाकर मिठाई।

चाहूंँ लंबी उम्र मिले, दुश्मन काँपें हिले,
हरदम भाई जीते,रक्षाबंधन धाई।।
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कविता झा'काव्या कवि'
#लेखनी
##लेखनी दैनिक काव्य प्रतियोगिता 
6.08.2022

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7 Comments

Punam verma

07-Aug-2022 09:41 PM

Very nice

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Gunjan Kamal

07-Aug-2022 10:40 AM

बहुत खूब

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Abhinav ji

07-Aug-2022 09:30 AM

Very nice👍

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